ईश्वर सिंह को सांगोद, लाडपुरा,पीपल्दा और कोटा उत्तर से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की मांग

- जातिगत आधार, सामाजिक सेवा के साथ शैक्षणिक आधार पर प्रबल दावेदार

- जनमानस की समस्याओं के निराकरण के लिए किए कई आंदोलन

कोटा 25 अक्टूबर। विधानसभा चुनाव के आगाज के साथ ही प्रबल दावेदार के रूप में शिक्षित, समर्पित, समाजसेवी और जातिगत आधार पर टिकट वितरण हो रहा है, इसी के आधार पर हाडौती की धरती पर गांधीवादी सोच तथा शहिदे आजम भगत सिंह की विधारधारा को आत्मसात किए शिक्षक कर्मचारियो की जायज मांगो व सामाजिक न्याय के लिए इन्कलाब बुलंद करने वाले हम सभी के प्रेरणा स्त्रोत दाभाई ईश्वर सिंह जी की कर्मचारी, जगत में दी गई सेवाएं, जातिगत आधार, शिक्षित और जनसेवा के उनके जस्बे को देखते हुए उन्हें सांगोद, लाडपुरा, पीपल्दा और कोटा उत्तर से कांग्रेस प्रत्याशी बनाए जाने की कई संगठनों और सामाजिक सेवा से जुडे कर्मचारी नेताओं ने मांग उठाई है। अजीम पठान, घांसी लाल सामरिया, राजेंद्र सिंह सिसोदिया, चन्द्र मोहन राव, भेरू सिंह राठोड़, पूर्व पदाधिकारी, शिक्षक संघ शेखावत व कर्मचारी सयुंक्त महासंघ कोटा संभाग सहित कई लोगों ने कांग्रेस पार्टी से ईश्वर सिंह को टिकट दिए जाने की मांग की है। सभी कर्मचारी नेता व समाज के लोगों ने एक स्वर में कहा कि ईश्वर सिंह को कांग्रेस को प्रत्याशी बनाना चाहिए। सिंह से हजारों लोग उनके साथ पहले से ही जुडे हुए हैं और कांग्रेस को एक सशक्त, समर्पित और संघर्षशील व्यक्तित्व के कारण सफलता मिलेगी।

- 1988 से कर रहे सेवा कार्य, कई बडे आंदोलन के बने सूत्रधार
राजस्थान के गांधीवादी नेता भरत सिंह  कुन्दरपुर को अपना आदर्श मानने वाले ईश्वर सिंह का सेवाकाल 1988 से प्रारंभ हुआ और 2 साल बाद 1990 मे उन्हें राजस्थान शिक्षक संघ (शेखवत) के जिलामंत्री की जिम्मेदारी दी गई। उन्होने राजस्थान गैर सरकारी शिक्षा अधिनियम 1989 को लागू करवाने हेतु कोटा के निजी स्कूलो के शिक्षको को नियामानुसार वेतन भत्ते व अन्य परिलाभ दिलाने हेतु लम्वा संघर्ष किया। इसके साथ ही वह जन सेवा से भी जुडे रहे। निर्धन की मदद, शिक्षा का प्रचार प्रसार, गांव गांव तक मदद के हाथ बढाना, चिकित्सा के क्षेत्र में शिविरों के माध्यम से आमजन को लाभांवित करना, कोविड के समय लोगों की मदद करना, सामाजिक व धार्मिक आधार पर सेवा करना, सरकार की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचे इसके लिए भी उन्होंने लम्बे अंतराल तक कार्य किया है। ऐसे में सेवाभावी ईश्वर सिंह को प्रत्याशी बनाए जाने की मांग इन चार विधानसभाओं से उठ रही है। उनकी मांग का समर्थन आमजन तो कर ही रहा है, कर्मचारियों का बडा वर्ग भी उनके साथ खडा है।

- वर्ष 2000 से वर्ष 2023 तक लगातार शिक्षकों की सेवा की
शिक्षक कर्मचारियो मे लोकप्रियता का ही नतीजा रहा कि 110 करोड़ की शिक्षा विभाग कर्मचारीगण सहकारी सभा के चुनाव में वर्ष 2000 से 2023 तक लगातार इनके नेतृत्व में पेनल जीता। इन्होंने सदस्यों रिकार्ड 850 करोड़ से अधिक के ऋण वितरित किए तथा विभिन्न विधालयों में 80 लाख से अधिक के जनहित के काम करवाए। 90 के दशक में शिक्षक संघ एंव कर्मचारी संयुक्त महासंघ की अगवाई करते हुए हर तात्कालिक मुद्दे पर ज्ञापन, धरना, प्रर्दशन, रेली, विरोध सभाऐं कर सरकारों को चैताया इसी से खफा दोनो दलो की सरकारो ने इन्हें बार-बार तबादला कर प्रताडित किया। इनके द्वेषतापूर्ण तबादलों को भरत सिंह के द्वारा मुख्यमंत्री स्तर पर निरस्त करवाया गया। इनके द्वारा वर्ष 2013 में 97 शिक्षकों को पदोन्नति पर झालावाड़ लगाने से खफा होकर इनमें संशोधन की मांग को लेकर 3 दिन तक आमरण अनशन किया। नतिजतन कांग्रेस शासन ने इनकी बात मान सभी 97 शिक्षको को कोटा शहर, जिले में लगाया। जिला प्रमुख से लड़कर पंचायत समिति लाडपुरा के 190 शिक्षको के तबादले रूकवाए। हाड़ौती में एन. पी. एस. हटाओ ओ. पी. एस. लाओ की मांग पर राजस्थान शिक्षक महासंघ की अगुवाई में चले आंदोलन में सक्रियता से भागीदारी निभाई, मौजूदा मुख्यमंत्री जी द्वारा राज्य के कर्मचारियो को ओल्ड पेंशन का लाभ देने पर उनका जयपुर जाकर अभिनन्दन किया।

ईश्वर सिंह ने बताया कि उनका ज्यादातर सेवाकाल 18 वर्ष तक सांगोद विधानसभा क्षेत्र में रहा है और उसे क्षेत्र में उनकी अच्छी काशी पेट है और बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक उन्हें अच्छी तरह से पहचानते हैं ऐसे में उनकी प्रबल दावेदारी सांगोद विधानसभा क्षेत्र से बनती है और उन्होंने सांगोद से ही कांग्रेस का उम्मीदवार बनाने की मांग पर्यवेक्षकों के सामने और आला कमान से कर रखी है.