छात्रसंघ चुनाव हुए तो सुपड़ा साफ होगा विधानसभा चुनावों में कॉग्रेस का - सैनी

छात्रसंघ चुनाव हुए तो सुपड़ा साफ होगा विधानसभा चुनावों में कॉग्रेस का .........सैनी


सुमेर सिंह राव

उदयपुरवाटी l
लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रसंघ चुनाव राजनीति की पहली सीढ़ी होते 
हैं। पिछले छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस का छात्र संगठन एनएसयूआई का एक भी प्रत्याशी किसी विश्वविद्यालय में नहीं जीता था। इस बार भी विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों में एनएसयूआई की मिट्टी पलीत होने और संभावित हार से बचने के लिए तानाशाही सरकार ने छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगाई है जो दुर्भाग्यपूर्ण है।  छात्र सेवक एड कमल सैनी ने बताया की लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के उल्लंघन और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत सेमेस्टर सिस्टम लागू नहीं होने का हवाला देने वाली सरकार की मंशा चुनाव कराने की है ही नहीं, क्योंकि चुनावी वर्ष में सरकार भली भांति समझ गई है राज्य का युवा से जुड़े छात्र संगठन एनएसयूआई को वोट नहीं देगा, इसलिए चुनाव ही नहीं करवाए जा रहे हैं। जिन विश्वविद्यालयों/ महाविद्यालयों में न्यूनतम 180 दिन अध्यापन कार्य करवाना भी चुनौतीपूर्ण हो तो राज्य की शैक्षणिक स्थिति की दुर्दशा का अंदाजा साफ लगाया जा सकता है।  एड. सैनी ने कहा कि मैं भी वह विद्यार्थी परिषद की बदौलत ही हूं। सरकार का यह फैसला छात्र हितों की आवाज बुलंद करने वाले कई छात्र नेताओं और आम छात्र के लोकतांत्रिक अधिकार पर कुठाराघात है।सैनी ने ये भी कहा की इस बार राजस्थान के कॉलेजों में छात्र नेता गिरी बंद जानकारी के लिए आपको बता दूं गत वर्ष राजस्थान के 16 विश्वविद्यालय में एक में भी एनएसयूआई का अध्यक्ष नही बना था राजस्थान में छात्रसंघ चुनाव में कांग्रेस की स्टूडेंट विंग NSUI का सूपड़ा साफ होता है इसलिए  राजस्थान कांग्रेस ने सरकार के माध्यम से छात्र संघ चुनाव नहीं करवाने का फैसला लिया है