भारत की संस्कृति तो कल्हण के काव्य और शंकर के मठ में है - डॉ.गोयल

भारत की संस्कृति तो कल्हण के काव्य और शंकर के मठ में है - डॉ.गोयल

जश्न-ए-आजादी के मौके पर जोधपुर के पद्मावती नगर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । इस मौके पर बुलंदशहर के आकाश नौरंगी, कवि और रंगकर्मी डॉ. हितेंद्र गोयल,जैतारण से विकास राज भाटी, श्रवणदान शून्य, मनशाह नायक और संजीदा खानम ने अपनी देशभक्ति पूर्ण कविताओं से सशक्त उपस्थिति दी । कार्यक्रम का आगाज युवा कवि विकास राज भाटी ने किया उन्होंने रानी पद्मावती के संदर्भ में वीर रस प्रधान कविता पढ़ी। संजीदा खान ने अपनी ग़ज़ल से दिल जीताl डॉ. हितेंद्र गोयल ने गांव और शहर की संस्कृति के बीच खोते इंसान को रेखांकित करते हुए अपने कविता पाठ में गांव के दर्द को बताया। ' एक अरसा हो गया है मां ने डांटा नहीं मुझे किसी बात पर \ उसके सामने जानबूझकर कुछ तोड़ना फोड़ना अच्छा लगता है।' " भारत की संस्कृति तो हो संस्कृति है जो कल्हण के काव्य में, शंकर के मठ में ,परशुराम के अस्त्र में, राम के शस्त्र में ,कृष्ण की गीता में, सावित्री सीता में ,पद्मिनी की चिता में, अभिमन्यु के बलिदान में, प्रताप के स्वाभिमान में, शुक्र की रिती में, चाणक्य की नीति में ,चेतन्य की चेतना में तो मीरा की वेदना में पुष्पित, पल्लवित और सुरभीत हुई है ।"
मनशाह नायक के दोहे और गजलें श्रोता मंत्रमुग्ध होकर सुनते रहे । आकाश नौरंगी ने वीर रस में भगत सिंह को जिंदा किया और उपस्थित श्रोताओं में देश प्रेम का जज्बा कर दिया। कार्यक्रम का सुंदर संचालन अपने चुटीले अंदाज में किया कवि श्रवण दान शून्य ने । मुख्य अतिथि के रूप में पार्षद भंवर कंवर बाईसा ने सभी को साधुवाद दिया । पद्मावती नगर के सभी पदाधिकारियों ने आमंत्रित कवियों को उत्तरीय, कवि सम्मान और तिरंगे का साफा पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में पद्मावती नगर और मोहन विलास के सैकड़ों रहवासियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज की ।कॉलोनी में किसी राष्ट्रीय त्यौहार का इस तरह मनाया जाना भारतीय संस्कृति और सभ्यता को संपुष्ट करता है ।
रिपोर्टर गौतम के गट्स जोधपुर