जयपुर। राजस्थान के सीकर जिले में खंडेला उपखंड में गुरुवार को एक अत्यंत लोमहर्षक घटना घटित हुई। भ्रष्टाचार से लड़ते हुए खंडेला एसडीएम कोर्ट के बाहर वकील हंसराज मावलिया ने स्वयं पर पेट्रोल डालकर आग लगा ली। इलाज के दौरान जयपुर में हंसराज भ्रष्टाचार से लड़ते हुये शहीद हो गये। हंसराज मावलिया के बैग से मिले उनके हस्तलिखित सुसाइड नोट में उन्होंने अपनी मौत के लिए खंडेला के SDM राकेश कुमार चौधरी तथा थाना अधिकारी घांसीराम मीणा को जिम्मेदार ठहराया है। सुसाइड नोट एवं वीडियो में एडवोकेट हंसराज ने एसडीएम(SDM) राकेश कुमार चोधरी पर पक्षपात करने, अस्थाई निषेधाज्ञा के प्रार्थना पत्र पर आदेश करने की एवज में रुपए मांगने तथा अभद्र व्यवहार करने की कही हैं। इस सुसाइड नोट ये लिखा है कि एसडीएम दलालों के माध्यम से पैसे लेकर मनोवांछित आदेश करता था साथ ही SHO घासीराम मीणा ने मारपीट करने की धमकी दी थी। एडवोकेट हंसराज मालविया की दर्दनाक शहादत ने राजस्व न्यायालयों में खुलेआम हो रहे भ्रष्टाचार को बेनकाब किया। भ्रष्टाचार की गन्दगी पूरे राजस्व न्यायालय है। आम किसान के लिए न्याय प्राप्ति बिना भ्रष्टाचार के नामुमकिन है। राजस्व न्यायालयों के अधिकांश पीठासीन अधिकारी कानूनी प्रावधानों को नही समझते और न ही समतामूलक नैसर्गिक न्याय में उनकी रुचि होती है। सभी मामलों में न्याय बिकता है। वकील समुदाय आम आदमी को, गरीब किसान को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ता है, और जी जान से पैरवी करता है। लेकिन फैसला तो पूर्व निर्धारित होता है फैसले का निर्धारण भ्रष्ट पीठासीन अधिकारी को रुपए देने वाले दलाल करते हैं। महासचिव गजराज सिंह ने कहा कि हमें यह कहने में संकोच नहीं होना चाहिए कि कुछ अपवादों को छोड़कर तहसील से लेकर राजस्व मंडल तक राजस्व न्यायालयों की पूरी श्रंखला निष्क्रियता, भेदभाव, सिफारिशों, रिश्वतखोरी, पक्षपात, लापरवाही, उदासीनता अज्ञानता अथवा अल्प ज्ञान जैसे घातक रोगों से ग्रस्त है। भ्रष्टाचार तो मानो राजस्व कार्यप्रणाली की रग रग में लहू की तरह दौड़ रहा है। पटवारी जमीन की रजिस्ट्री कराने से लेकर इंतकाल खोलने तक के ठेके लेकर गरीब किसानों से दस-दस गुना अधिक राशि वसूल कर रहे हैं। हर रजिस्ट्री पर डेढ प्रतिशत कमीशन तो जैसे सामान्य नियम बन चुका है। आम धारणा है कि कई एसडीएम अदालतों में स्टे-आर्डर पांच हजार रुपये से पचास हजार में बिकते हैं। कोई भी काम हो दलाल आपकी सेवा में तत्पर मिलेंगे कानून न कायदा, पैसे दे कर काम करवाने में फायदा राजस्व न्यायालय का सूत्र वाक्य बन चुका है। राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेश वकालत की कोई वैल्यू नहीं है। वकील समुदाय उन लोगों के सामने कानून की दलीलें में पेश कर न्याय की उम्मीद करते हैं, जिन्होंने कभी कानून की पढ़ाई नहीं की, जिनके पास विधि स्नातक की डिग्री नहीं है, फिर वहां पैसा ही कानून बन जाता है और रिश्वत ही कानून की सबसे बड़ी नजीर बन जाती है। अपने सुसाइड नोट में वकील हंसराज ने अपनी मर्मान्तक पीड़ा जाहिर की है, जिससे आज राजस्व न्यायालय के तकरीबन हर वकील को गुजरना पड़ता है। जब एक मजबूत व सच्चा केस लड़ते हुए वकील अपने पक्षकार को न्याय नहीं दिला पाता और झूठे और मक्कार दलाल रिश्वत के बल पर इंसाफ को अपनी अंक-शायिनी बनाने में कामयाब हो जाते हैं तो वकील को जो आत्मग्लानि होती है, वही घनीभूत रूप में हंसराज के आत्मदाह के रूप में सामने आई। अधिवक्ता गण हमेशा अपने मुवक्किल के हित के लिए लड़ते हैं लेकिन इस लड़ाई में जब उनका आत्मसम्मान और स्वाभिमान दाव पर लग जाता है, उस पीड़ा की चरम परिणति हमें एडवोकेट हंसराज की असामयिक और अस्वाभाविक शहादत में नजर आती है। सरकार को तत्काल एसडीएम राकेश कुमार चौधरी तथा एसएचओ घासीराम मीणा को बर्खास्त कर गिरफ्तार किया जाए ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों को पोस्टिंग नहीं दी जानी चाहिए विधायक, सांसद, राज्य सरकार को ध्यान में रखना चाहिए साथ ही मृतक वकील भाई के आश्रितों को सम्मानजनक मुआवजा व सरकारी नौकरी दी जाए एडवोकेट हंसराज ने अपना बलिदान दे कर भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष का आगाज किया है। उसे संपूर्ण वकील समुदाय को आगे बढ़ाते हुए ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों की बार में शिकायत करनी चाहिए व राज्य सरकार में व एसीबी में शिकायत करनी चाहिए तथा रेवेन्यू कोर्ट में भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति होनी चाहिए।