Ujjain: सालों से लोगों ने सुना है कि बिछड़े हुए लोग कभी-कभी कुंभ में मिलते हैं। यह चमत्कारी कहानी कुंभ के शहर उज्जैन से भी जुड़ी है। बेशक अभी यहां कुंभ नहीं हो रहा है और किसी को इस जगह से अलग होने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन महाकाल की कृपा से पिता को अपना खोया हुआ बेटा यहां मिल गया है। यह कहानी बहुत ही फोटोजेनिक लगती है, लेकिन यह सच है।
यह कहानी उत्तर प्रदेश के कासगंज निवासी श्री कृष्ण कुमार की है। उनके मुताबिक करीब पांच महीने पहले उनका विकलांग बेटा भाग गया था. पिता ने उसकी हर जगह तलाश की, पुलिस को गुमशुदगी की रिपोर्ट भी लिखी, लेकिन वह नहीं मिला। पिता ने पुत्र प्राप्ति की आशा लगभग छोड़ दी थी। श्रीकृष्ण के अनुसार सर्वत्र कुंठित होने के कारण उन्हें ईश्वर में आस्था थी। तभी किसी ने उसे उज्जैन के महाकाल मंदिर में जाकर मन्नत मांगने को कहा, शायद बेटा मिल जाए।
श्री कृष्ण 800 किमी उज्जैन आए और महाकाल से अपने पुत्र की कामना मांगी। फिर, एक चमत्कार हुआ। उसे खोया हुआ लड़का मंदिर के पास एक आश्रम में बैठा मिला। पहले तो श्रीकृष्ण को यह देखकर विश्वास नहीं हुआ। फिर बेटे को गले से लगाते ही वह बहुत रोने लगा। उन्होंने कहा कि वास्तव में यह महाकाल का चमत्कार था और मंदिर में कदम रखते ही वह जिस आशा के साथ यहां आए थे वह पूरी हो गई।
श्रीकृष्ण ने मीडिया को बताया कि वह उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले के रामसिंहपुरा सोरो में रहते हैं। विकलांग पंकज पांच भाई और एक बहन में 17 साल का है। श्रीकृष्ण मजदूरी करते हैं। बावजूद उन्होंने बेटे के इलाज पर कोई कसर नहीं छोड़ी।। श्रीकृष्ण कुमार के मुताबिक पंकज फर्श पर सो रहा था। लेकिन अगली सुबह वह चला गया। उसे खोजने के लिए उसने अलीगढ़, बरेली और दिल्ली समेत तमाम शहरों के चक्कर लगाए। लेकिन वो मिला, तो महाकाल के दरबार में।
श्री कृष्ण कुमार पवन समाधिया के एक मित्र महाकाल के दर्शन करने आए। जब श्रीकृष्ण ने उनसे अपने पुत्र के लिए भी प्रार्थना करने को कहा तो पवन ने उन्हें अपने साथ जाने के लिए कहा। पवन अक्सर महाकाल के दर्शन करने आता है। पास के शहर उज्जैन में ही एक सेवधाम आश्रम है, जो गरीबों का घर है। पवन और श्री कृष्ण कुमार उज्जैन आए और सबसे पहले महाकाल के दर्शन किए। तभी अचानक पवन सोचता है कि जब से इतनी दूर आ गया है, आश्रम भी क्यों नहीं जाता? यह आश्रम शहर से महज 14 किमी दूर है, जिसका प्रबंधन सुधीर भाई गोयल करते हैं। जब वे आश्रम पहुंचे तो श्रीकृष्ण कुमार ने सुधीर भाई को अपने लापता बेटे की तस्वीर भी दिखाई। यह देख सुधीर भाई चौंक गए। उन्होंने कहा कि उनका बेटा इस आश्रम में तीन महीने से रह रहा था।
दरअसल, पंकज 29 जुलाई 2022 को उज्जैन में हीरा मील की चाल रोड पर दयनीय हालत में पड़ा मिला था। चाइल्ड लाइन ने देवास गेट पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बच्चे को उज्जैन बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया। वहां से उन्हें सेवाधाम आश्रम द्वारा संचालित श्री रामकृष्ण बाल गृह भेजा गया।