सोयाबीन की फसल पर प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन
ब्यूरो चीफ शिवकुमार शर्मा
बूंदी राजस्थान
बूंदी, 20 सितंबर। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अन्तर्गत कृषि विज्ञान केन्द्र की ओर से मंगलवार को रायथल का झौंपड़ा में सोयाबीन की फसल के कलस्टर प्रथम पंक्ति प्रदर्शन लगाए गए। प्रदर्शनों में सोयाबीन की फसल को एकीकृत फसल प्रबन्धन विधि के द्वारा कृषकों के खेत पर होने वाली पैदावार के परिणामों एवं किसानों के स्वयं के अनुभवों को गांव के अन्य कृषकों को जानकारी देने के लिए प्रक्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया। जिसमें गांव के 39 कृषकों ने भाग लिया। आये हुए किसानों ने खेत में फसल को देखकर इस किस्म की सराहना की।
कार्यक्रम मे ंनोडल अधिकारी इंदिरा यादव ने किस्म जे. एस. 20 34 की विशेषताओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह किस्म मध्यम ऊँचाई वाली होती है। बीज का रंग पीला, फूल सफेद, पत्तियाँ गहरे रंग की तथा तने व फलियाँ रोयेदार होती है। यह किस्म 85-90 दिन में पककर तैयार हो जाती है। औसत उत्पादन 20-25 क्विंटल तक हो जाता है। साथ ही बताया कि एकीकृत फसल उत्पादन विधियों एवं समन्वित कीट रोग प्रबन्धन तकनीकों को अपनाकर कृषक सोयाबीन की अधिकतम पैदावार लेते हुए अपनी आय को बढ़ा सकते हैं एवं उत्पादित सोयाबीन को आगामी बुवाई के लिए बीज के रुप में रखकर काम में भी लिया जा सकता है।
केन्द्र के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. घनश्याम मीणा ने पशु प्रबन्धन के बारे में जानकारी देते हुए वर्तमान समय में गायों में चल रही वायरस जनित लम्पी बीमारी के बचाव के लिए टीकाकरण करने का सुझाव दिया। साथ ही गाय के बाड़े में उचित साफ-सफाई एवं आहार प्रबन्धन की जानकारी दी। गृह वैज्ञानिक डॉ. कमला महाजनी ने पोषण संबंधी जानकारी देने के साथ ही न्यूट्री गार्डन लगाने की उपयोगिता के बारे में बताया। कार्यक्रम का संचालन दीपक कुमार ने किया।