पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत संतुलित आहार का महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया

पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत संतुलित आहार का महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया

ब्यूरो चीफ शिवकुमार शर्मा
बूंदी राजस्थान

17 सितम्बर। कृषि विज्ञान केन्द्र, बून्दी पर पोषण अभियान एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम के अन्तर्गत संतुलित आहार का महत्व पर शनिवार को संगोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें महिला एवं बाल विकास विभाग से आयी हुई आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, वर्ल्ड विजन से आयी हुई महिलाओं, किशोरी बालिकाओं एवं रेड्डी कार्यक्रम (ग्रामीण उद्यमिता जागरुकता विकास योजना) सहित 114 कृषक महिलाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में आये हुये प्रतिभागियों को कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर का उद्भोदन कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया।
केन्द्र के अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने कार्यक्रम में आये अतिथियों, आंगनबाड़ी एवं वर्ल्ड विजन से आयी हुई महिलाओं को संतुलित आहार के महत्व के बारे में बताते हुए कुपोषण का शिकार होने से बचने के लिए भोजन में पोषक तत्वों के महत्व पर जानकारी देते हुए पोषण वाटिका स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। साथ ही बताया कि ऐसे मोटे अनाज जैसे बाजरा, रागी व ज्वार जो वर्तमान में गौण हो चुके हैं, को अपने आहार में बढ़ावा देने के लिए कहा और बताया कि इनके द्वारा भोजन में आयरन व कैल्शियम की पूर्ति की जा सकती है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रमेश चन्द जैन, उपनिदेशक कृषि विस्तार ने पोषण दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिवस पर महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ने हेतु प्रोत्साहित किया एवं कृषि शिक्षा में छात्राओं को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली छात्रवृति योजना के बारे मंे बताया।
इफको फाउंडेशन संस्था बून्दी के क्षेत्रीय प्रबन्धक जयपाल सिंह ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पोषण दिवस के उपल्क्ष्य पर पोषण वाटिका, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व इफकों के योगदान से समस्त कृषि विज्ञान केन्द्रों में पोषण दिवस का आयोजन किया जा रहा है। इफको की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इफको की स्थापना 3 नवंबर 1967 के साथ ही इस संस्था का उद्देश्य किसानों को अच्छी गुणवत्ता के खाद व बीज उपलब्ध कराना है। किसानों को 20 प्रतिशत लाभांश पर कम लागत में अधिक उत्पादन करने वाले नैनो डीएपी, नैनो यूरिया की महत्ता के बारे में बताया। साथ ही बताया कि कृषि क्षेत्र में रसायनिक उर्वरकों का उपयोग करने से भूमि की गुणवत्ता खराब होती है। वर्तमान में भूमि की गुणवत्ता बनी रहे इसमें वृद्धि के लिए नैनौ तकनीक युक्त डीएपी व यूरिया का उपयोग बढ़ाया जाये जिससे उत्पादन लागत कम होगी और उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी।
उद्यान वैज्ञानिक इंदिरा यादव ने गृहवाटिका में उगायी जाने वाली बायोफॉर्टिफाइड न्यूट्री अनाज के बारे में महिलाओं को अवगत करवाया व बगीचे एवं नर्सरी प्रबन्धन के बारे में बताया।
कार्यक्रम की नोडल अधिकारी डॉ. कमला महाजनी, गृह विज्ञान विशेषज्ञ ने गोष्ठी के दौरान पोषण थाली में तिरंगा भोजन शामिल करने को कहा। उन्होंने कहा कि तिरंगा में अनाज, हरी सब्जियाँ, दही, दालें व फल का होना चाहिए। उचित पोषण के लिए खाने में कार्बोहाइडेªेट, प्रोटीन, विटामिन्स, खनिज लवण में आयरन, कैल्शियम, आयोडीन उपयुक्त मात्रा में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि पोषण वाटिका से घर में सब्जियाँ लगा कर इन सब्जियों को घर में काम लेकर परिवार के पोषण को सुधारा जा सकता है। साथ ही जल संरक्षण के बारे मंे भी जानकारी दी।
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं द्वारा लोकगीत के माध्यम से लड़का-लड़की को समान पोषण व एक समान मानने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों से केन्द्र पर वृक्षारोपण भी करवाया गया एवं आयी हुई सभी प्रतिभागियों को इफकों द्वारा न्यूट्री गार्डन किट एवं कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा फलदार पौधों का वितरण किया गया। मंच संचालन डॉ. घनश्याम मीणा, सह आचार्य (पशुपालन) ने किया। कार्यक्रम के संचालन में दीपक कुमार, लोकेश प्रजापत एवं रामप्रसाद ने सहयोग प्रदान किया।