जयपुर। भारत और चीन के बीच एलएसी पर हुई हिंसक झड़प के बाद अब चीन भारत से सुलह और शांति करने के मूड में दिख रहा है। सूत्रों की मानें तो एलएसी तवान के बीच पहली बार कोई चीन का वरिष्ठ नेता भारत की यात्रा कर सकता है। रिर्पोट्स के मुताबिक चीन के विदेश मंत्री वांग यी भारत की यात्रा कर सकते हैं। भारत दौरे से पहले वांग यी नेपाल का दौरा कर सकते हैं। बता दें कि इससे पहले भारत और चीन के बीच कई सैन्य यात्रा विफल हो चुकी हैं।
पैंगोंग झील से शुरू हुआ था तनाव
वैसे चीन की साम्राज्यवादी नीति से पूरा विश्व वाखिफ है। चीन का हमेशा से अपने पडोसी देशों की सीमाओं के मामले में विवादित रहा है। लगभग दो साल पहले पैंगोग झील में 5 मई 2020 को सीमा पर भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई, तब से ही सीमा क्षेत्र पर गतिरोध बना हुआ है। इसके बाद 15 जून, 2020 दोनों देशों के बीच हुई हिंसक झड़प में कम से कम 20 भारतीय और 40 से अधिक चीनी सैनिक मारे गए। हालांकि चीन इस झड़प में हमेशा से अपना कम नुकसान बताता आया है।
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि, पिछले कुछ समय से चीन और भारत के द्विपक्षीय संबंधों में खटास पैदा हो गई है। उन्होंने कहा दोनो देशों के बीच बढ़ रहे तनाव को बातचीत करके एवं सीमा विवाद का "निष्पक्ष और न्यायसंगत" समाधान करके कम किया जा सकता है।
जब चीन के विदेश मंत्री से सीमा मुद्दे और दोनों पड़ोसियों के बीच संबंधों पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "चीन और भारत के संबंधों को हाल के वर्षों में कुछ झटके का सामना करना पड़ा है जो दोनों देशों और दोनों लोगों के मौलिक हितों की पूर्ति नहीं करता है।"
भारत का साफ रुख
वहीं, एलएसी विवाद पर भारत का इरादा स्पष्ट है। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस साल जर्मनी में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन (एमएससी) में कहा था कि बीजिंग द्वारा सीमा समझौतों का उल्लंघन करने के बाद चीन के साथ भारत के संबंध में कठनाईयां आयी है। और इन संबधों की स्थिति सीमा की स्थिति पर निर्भर करेंगी। साथ ही उन्होंने साफ कहा थ कि भारत लद्दाख सीमा मुद्दे पर चीन के साथ पूरी स्पष्टता के साथ बातचीत कर रहा है कि वह यथास्थिति में किसी भी बदलाव या वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) को एकतरफा रूप से बदलने के किसी भी प्रयास के लिए सहमत नहीं होगा।