हरने भूमि का भार _ हरि लेते हैं अवतार

बारां  18जनवरी। भागवत कथा में पंडित मनावत ने  कथा के दौरान प्रसंग की व्याख्या करते हुए बताया की जो गंतव्य तक ले जाए वह गंगा है , क्योंकि गंगा हरि के चरणों से निकली है इसलिए वह हरि तक ले जाने में समर्थ है । जो पितरों को पुरुषोत्तम से मिला दे उसी प्रवाह का नाम गंगा है, यह विचार नरेंद्र दीगोदिया द्वारा आयोजित भागवत कथा में पंडित मनावत जी की ने व्यक्त किया।


आज गंगा अवतरण और कृष्ण जन्मोत्सव का दिव्य वर्णन कथा में किया गया। अवंतिका उज्जैन से पधारे विद्वान वक्ता पंडित श्याम जी मानावत ने कहा कि धरती को न पर्वत का , न पेड़ों का और न ही सागर का भार लगता है। पृथ्वी केवल पापी के भार से विचलित हो जाती है और पृथ्वी के इस भार को हरने के लिए हरी अवतार लेते हैं। आज कृष्ण जन्मोत्सव मेलखेड़ी स्थित फार्म हाउस पर धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने जी भरकर नृत्य किया।