कला संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग से सम्बद्ध राजस्थान उर्दू अकादमी जयपुर की ओर से जोधपुर के सरदार क्लब स्थित चंद्रा इंपीरियल होटल के हॉल में आज 'अख़्तरुल ईमान नज़्म के आईने में' विषयक ऑल इंडिया सेमिनार का शुभारंभ हुआ।

संवाददाता गौतम के गट्स जोधपुर|

दो दिवसीय अखिल भारतीय सेमिनार मेँ देश भर के लगभग 15 साहित्यकारों द्वारा सोमवार को विभन्न सत्रोँ मेँ पत्र वाचन किया जाएगा।
रविवार शाम उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता करते हुए अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त शाइर एवँ आलोचक शीन काफ़ निज़ाम ने अख्तरुल इमान की नज़्मोँ का उलट कर पठन किया और पठन प्रकिया को समझाते हुए नज़्मोँ का पाठ किया और बताया कि अख्तरुल ईमान फ़नकार-शाइर थे अख़्तरुल ईमान गांव को बार-बार याद करते है महानगर में रहने के बावजूद उन्होंने शहरी जिंदगी को कुबूल नहीं किया। उनका ज़ेहन हमेशा गांव ही में बसता था। शीन काफ़ निज़ाम ने अख्तरुल ईमान के नज्मोँ से ऐसे शब्दों के बारे मेँ बताया कि ऐसे शब्द सिर्फ़ अख़्तरुल ईमान ही ने प्रयुक्त किये हैँ जैसे कि 'बखरे' और 'गुन्दनी'आदि ये ऐसे लफ़्ज़ हैं जो अमूमन नहीं बोले जाते, लेकिन उन्होंने उनका भी सर्जनात्मक प्रयोग किया है। निज़ाम ने कहा कि अख़्तरुल ईमान ऐसे शाइर थे जो शाइरी को अपना मजहब मानते थे उनकी नज़्मोँ ने आने वाली पीढ़ियोँ को प्रभावित किया
निज़ाम ने अख़्तरुलईमान की नज़्मोँ मेँ छंद के बजाय आहँग को वरीयता देते हुए उनकी नज़्मोँ की सराहना की अौर बताया कि गोपीचंद नारंग को अख्तरुल इमान की नज़्मोँ में कहानी नज़र आती है। शम्सुर्रहमान फारुकी को ड्रामा नज़र आता है और हम उनके आहँग के आशिक़ हैं। आप पढ़ेंगे तो आपको यह सब कुछ उसमें मिलेगा। इससे पहले मुख्य वक्ता ख्वाजा नसीम अख्तर जो कोलकाता से पधारे हैं और जिन्होंने अख्तरुल इमान पर सबसे पहले पीएचडी की उपाधि हासिल की है अपने वक्तव्य मेँ कहा कि अख़्तरुलईमान स्वभाव से विनम्र थे और वह कहते थे कि जो बेदीन है वह अच्छा शाइर नहीं हो सकता। अख्तरुल इमान की भूमिकाओं को तटस्थ भाव से पढ़ा जाना चाहिए और नसीम अख्तर ने अख़्तरुल ईमान द्वारा प्रयुक्त बहरोँ पर नज़्मोँ को बतौर मिसाल पाठ करते हुए विस्तृत चर्चा की और बताया कि अख्तरुल ईमान ने सफल प्रयोग किए हैं। मुख्य अतिथि के तौर पर जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.एल. श्रीवास्तव ने फिल्म सोसाइटी के। सक्रियता और शीन काफ़ निज़ाम के साथ अपने पुराने संबंधों को याद करते हुए सेमिनार के लिए शुभकामनाएं प्रदान की। इस अवसर पर संचालन के लिए दिल्ली से विशेष रुप से पधारीँ "ज़ी सलाम" की शगु़फ्ता यासमीन ने कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित किया। इससे पहले आरंभ में सभी मंचासीन अतिथि गणों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। राजस्थान उर्दू अकादमी के सेक्रेटरी सैयद मुअ़ज़्ज़म अली ने कार्यक्रम में स्वागत भाषण में उर्दू अकादमी की गतिविधियों पर प्रकाश डाला और बताया कि उनके चैनल पर 6 लाख व्यूवर्स इस समय है और भारत की 17 उर्दू अकादमी में यह संख्या सबसे ज्यादा है ।उद्घाटन सत्र मेँ राजस्थान उर्दू अकादमी द्वारा सद्य प्रकाशित
पुस्तकों का लोकार्पण भी किया गया जिसमें मुअज़्ज़म अली द्वारा सम्पादित"ग़ालिब शनासी : एक मुतालिआ़", अरशद अब्दुल हमीद द्वारा लिखित पुस्तक "रमूज़े-बलाग़त" "पण्डित जवाहरलाल नेहरू की अस्री मनीवियत" विशेष रूप से उल्लेखनीय हैँ । कार्यक्रम के अँत मेँ अकादमी सचिव मुअ़ज़्ज़म अली ने आभार व्यक्त किया।