ढाई साल की बालिका से ज्यादति के आरोपी को आजीवन कठोर कारावास
बारां 9 नवम्बर। न्यायालय विशिष्ठ न्यायाधीश लैंगिग अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 तथा बालक अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम 2005 संख्या-1 के विशेष न्यायाधीश हनुमान प्रसाद ने ढाई साल की अबोध बालिका से ज्यादति के 6 माह पुराने चर्चित मामले का निस्तारण करते हुए आरोपी को आजीवन कठोर कारावास एवं 55 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया है।
विशिष्ट लोक अभियोजक पोक्सो क्रम नं. 1 घांसीलाल वर्मा ने बताया कि 11 मई 2023 को एक व्यक्ति ने सीसवाली पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जिसमें उल्लेख किया गया था कि शाम को 4-5 बजे की बात है। वह अपने घर में सो रहा था। उसकी पत्नी बाजार गई हुई थी तथा 2-3 वर्ष की बच्ची घर पर ही थी। तभी उसका भाई घर पर आया तथा उसने बताया कि बच्ची रो रही है, जिसके लगी हुई है। उसके बाद बच्ची को फरियादी की बहन गोद में उठाकर घर पर लाई। फिर दोनों बालिका को लेकर गांव में चिकित्सक के पास पहुंचे। जिसने बालिका को अंता अस्पताल ले जाने को कहा। इसके बाद बालिका को अंता अस्तपाल लेकर गए। बालिका के जननांग में खून आ रहा था। रिपोर्ट में फरियादी ने आरोपी सोनू उर्फ जजक्या उर्फ बैल 30 वर्ष पुत्र बाबूलाल निवासी बड़गांव थाना सीसवाली पर बालिका से दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। गौरतलब है कि इस घटना के बाद पीड़ित पक्ष के साथ ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन भी किया था। जिससे यह मामला चर्चा का विषय बना रहा।
जिस पर पुलिस ने गंभीरता बरतते हुए आरोपी सोनू के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया। आरोप प्रमाणित पाए जाने पर पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया। जहां बुधवार को जिला न्यायाधीश हनुमान प्रसाद ने आरोप सिद्ध होने पर अभियुक्त सोनू को 363 के अपराध में 3 वर्ष का कठोर कारावास व 5 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। अदम अदायगी अर्थदंड पर अभियुक्त 3 माह का साधारण कारावास पृथक से भुगतेगा। इसी प्रकार अभियुक्त को धारा 5 (एम)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अपराध में आजीवन कारावास (जिसमें अभियुक्त शेष प्राकृत जीवनकाल के लिए कारावास अभिप्रेत है) एवं 50 हजार रूपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।
अदम अदायगी अर्थदंड, तीन वर्ष का साधारण कारावास पृथक से भुगतेगा। विद्वान न्यायाधीश हनुमान प्रसाद ने कहा कि अभियुक्त द्वारा लगभग ढाई वर्षीय बालिका को उसके विधिक संरक्षक की संरक्षता में से अपने कमरे में ले जाकर उसका व्यपहरण कर ज्यादति की गई। जिला न्यायाधीश कहा कि अभियुक्त को आजीवन दंडित किया जा चुका है, इसलिए धारा 376 एबी में अलग से दंडित किया जाना उचित नहीं है। उसकी सभी मूल सजाएं साथ-साथ चलेंगी। साथ ही पीड़िता को जरिये माता-पिता को अंतरिम सहायता प्रतिकर स्वरूप दिलाई जाएगी। इस प्रकरण में आरोपी द्वारा पूर्व में पुलिस व न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि नियमानुसार दी गई मूल सजा में से समायोजित कर दी जाएगी।
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