जयपुर। कश्मीर घाटी में पिछले कुछ दिनों में अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की हुई हत्याओं ने एक बार फिर सन 2000 में अनंतनाग के छत्तीसिंहपोरा गांव में हुए नरसंहार की भीषण घटना की याद दिला दी है। श्रीनगर जिले के संगम ईदगाह इलाके में सरकारी बॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल की सिख प्रिंसिपल सुपिंदर कौर और उसी स्कूल के हिंदू शिक्षक दीपक चंद की गुरुवार को आतंकियो द्वारा गोली मारकर हत्या कर दी गई। पहले आतंकियो ने इनके आईडी कार्ड चैक किये और फिर इन्हें बहार ले जाकर इनकी हत्या कर दी।
इस हत्या के बाद अब कश्मीर में अल्पसंख्य समुदाय के लोगा केंद्र सरकार से अपनी सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। कश्मीर में काम कर रहे सिख सरकारी कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। स्कूल में हुई इस घटना के बाद घाटी के सिख समुदाय अपना विरोध दर्ज कराने के लिए आगे आए हैं। और कश्मीर में काम कर रहे सिख सरकारी कर्मचारियों से अपने कर्तव्यों का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।
ऑल पार्टीज सिख कोऑर्डिनेशन कमेटी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने बताया, “हम हाल ही में हुई हत्या से बहुत चिंतित हैं, जिसने हमें छत्तीसिंहपोरा नरसंहार की याद दिला दी है, समुदाय के प्रतिनिधियों ने स्थिति पर चर्चा करने के लिए एक बैठक की और यह तय किया है कि जब तक सरकार सुरक्षा मुहैया उपलब्ध नही करवायेगी तब तक वे घरों पर ही रहेंगे।
बता दें कि ईदगाह की घटना से दो दिन पहले हिंदू पंडित माखन लाल बिंदरू, एक केमिस्ट, वीरेंद्र पवन, एक स्ट्रीट वेंडर और मोहम्मद शफी लोन, एक टैक्सी चालक की अलग-अलग घटनाओं में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।