जयपुर। तमिलनाडु में नीट की परीक्षा के मानसिक दबाव के कारण 20 बर्षीय छात्र धनुष ने आत्यहत्या कर ली थी। धनुष के परिवार वालों ने इस मौत का जिम्मेदार सरकार को बनाया। उन्होंने कहा था कि इस परीक्षा राज्य सरकार द्वारा खत्म करना चाहिए।
राज्य सरकार ने अब नीट को खत्म करने और सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए कक्षा 12 के अंकों के आधार पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक विधेयक पारित किया।
मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने विधेयक पेश किया और मुख्य विपक्षी एआईएडीएमके और उसके सहयोगी पीएमके सहित सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया। इस विधेयक के अनुसार भारतीय दंत चिकित्सा, भारतीय चिकित्सा और होम्योपैथी में यूजी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कक्षा 12 के अंक के आधार पर फैसला लिया जायेगा। इस विधेयक के पारित होने के बाद भाजपा विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर लिया। स्टालिन ने कहा कि सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने के लिए उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद राज्य सरकार ने नीट को खत्म करने का फैसला किया है।
स्टालिन ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश एके राजन के नेतृत्व वाली उच्च स्तरीय समिति की सिफारिश के आधार पर विधेयक पेश किया, जिसने जुलाई में अपनी रिपोर्ट पेश की थी। मद्रास उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कहा था कि विभिन्न हितधारकों के लगभग 86,000 अभ्यावेदनों को देखने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई थी और उनमें से अधिकांश ने कहा कि वे NEET नहीं चाहते हैं